Sand Art: भीलवाड़ा में सैन्ड आर्टिस्ट अजय रावत का कमाल, बनाई शहर के पांच गौरव की अनोखी कलाकृति, लोग हुए दीवाने

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Sand Art: पुष्कर के रहने वाले सैंड आर्टिस्ट अजय कुमार रावत ने लोकल 18 के साथ खास बातचीत करते हुए कहा कि भीलवाड़ा में बालू रेत कलाकृति बनाने के लिए भीलवाड़ा जिला प्रशासन द्वारा मुझे पहली बार बुलाया गया है. मैं भ…और पढ़ें

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बालू

बालू रेत कला के माध्यम से दिखाई पांच गौरव

हाइलाइट्स

  • भीलवाड़ा में सैंड आर्टिस्ट अजय रावत का प्रदर्शन
  • अजय रावत ने भीलवाड़ा के पांच गौरव को सैंड आर्ट में उकेरा
  • अजय रावत ने 12 सालों से सैंड आर्ट में बनाई पहचान

भीलवाड़ा. वैसे तो राजस्थान का मेवाड़ का प्रवेश द्वार भीलवाड़ा अपनी फड़ चित्रकार को लेकर पूरी दुनिया में मशहूर है और एक अहम स्थान भी रखता है. लेकिन भीलवाड़ा में एक कलाकारी ने भीलवाड़ा शहर वासियों का अपनी और आकर्षित किया है और भीलवाड़ा के रहने वाले लोगों का भी दिल जीत लिया है.

आकर्षण का केंद्र बना सैन्ड आर्ट 
पुष्कर के रहने वाले अजय कुमार रावत ने अपनी बालू रेत कला यानी कि सेंड आर्ट के माध्यम से भीलवाड़ा शहर के लोगों को अपनी और आकर्षित कर दिया है और रेत के टीलों पर उकेरा गया भीलवाड़ा के पांच गौरव आकर्षण का केंद्र बन गया. यह नजारा एक तरह से भीलवाड़ा शहर सहित जिले भर के रहने वाले लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया. इसको देखकर हर व्यक्ति इस आर्ट की फोटो लेने से अपने आप को रोक नहीं पा रहा है.

देशभर में कर चुके हैं कला का प्रदर्शन
पुष्कर के रहने वाले अजय कुमार रावत पिछले 12 सालों से रेत पर कलाकृति का काम कर रहे हैं और एक तरह से बालू रेत कला को यह जिंदा रखे हुए हैं. इसके माध्यम से इन्होंने अपनी एक अलग ही पहचान बनाई है और यहीं नहीं इन्होंने अपनी कला का प्रदर्शन राजस्थान ही नहीं बल्कि देश के अलग-अलग हिस्सों में भी किया है.

ज्यादा से ज्यादा पेड़-पौधे लगाए और हरियाली फैलाएं
लोकल 18 के साथ खास बातचीत करते हुए सैंड आर्टिस्ट अजय कुमार रावत ने कहा कि भीलवाड़ा में बालू रेत कलाकृति बनाने के लिए जिला प्रशासन द्वारा मुझे पहली बार बुलाया गया है. भीलवाड़ा पर अपनी कलाकृति का प्रदर्शन कर रहा हूं.  भीलवाड़ा में पहली बार बालू रेत कलाकृति को देखने के लिए लोगों में अच्छा आकर्षण भी है. भीलवाड़ा महोत्सव के तहत मैं यहां पर ‘पांच गौरव भीलवाड़ा’ बनाया है. मेरी आम जनता से यही अपील है कि हम ज्यादा से ज्यादा पेड़-पौधे लगाए और हरियाली फैलाएं.

सैंड आर्ट ने अजय को दिलाई पहचान
पुष्कर के निकट गनेहड़ा गांव के जन्मे अजय कुमार रावत ने कई वर्षों से रेतीले टीलों की इस कला को अपने संघर्ष और उत्साह की बदौलत जिंदा रखा है. अजय कुमार रावत बताते हैं कि वह 12 वर्षों से रेत के माध्यम से अपनी कला को प्रदर्शन कर रहे हैं. रावत ने सैंड आर्ट के क्षेत्र में अपनी अलग ही पहचान बनाई है. उन्होंने अपनी बाल रेत कला के माध्यम से कई संदेश भी दिए हैं और राजस्थान के अलावा अलग-अलग जगह पर अपनी इस कला का प्रदर्शन किया हुआ है

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सैंड आर्ट के माध्यम से भीलवाड़ा के पांच गौरव का प्रदर्शन, कला के कायल लोग हुए

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